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लाखों के घोटाले में फंसा संतराम यादव फिर विवादों में — कुड़कई पंचायत की नीलामी छोड़कर हुआ फरार!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही,(खबरो का राजा) — जिले की कुड़कई ग्राम पंचायत में आज एक बार फिर भ्रष्टाचार और मनमानी का खुला खेल देखने को मिला। पंचायत सचिव संतराम यादव, जिस पर पहले से लाखों रुपये के ठेका घोटालों और अनियमितताओं के आरोप हैं, ने आज पशु पंजीयन ठेका की नीलामी से पहले ही मैदान छोड़ दिया। जानकारी के अनुसार, पंचायत द्वारा 23 अक्टूबर को पशु पंजीयन ठेका की निविदा सूचना जारी की गई थी, जिसकी नीलामी आज 28 अक्टूबर को पंचायत भवन में प्रस्तावित थी। गांव के पंच, सरपंच और ग्रामीण सुबह से भवन में मौजूद थे, लेकिन सचिव संतराम यादव मौके पर नहीं पहुँचा। थोड़ी देर बाद ग्रामीणों ने देखा कि पंचायत भवन की दीवार पर एक चिट्ठी चस्पा की गई है, जिस पर लिखा था —“अपरिहार्य कारणों से आज की पशु पंजीयन नीलामी ठेका निविदा निरस्त की जाती है।”ग्रामीणों का कहना है कि सचिव ने यह नोटिस खुद लगाकर नीलामी रद्द कर दी और उसके बाद मौके से फरार हो गया। लोगों का आरोप है कि यह फैसला पूरी तरह से फर्जी और पूर्वनियोजित था। उनका कहना है कि सचिव ने पुराने ठेकेदारों से मिलीभगत कर पारदर्शी नीलामी को जानबूझकर रोका ताकि बाद में ठेका अपने चहेतों को दे सके।ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी सचिव संतराम यादव ने पशु पंजीयन ठेका में भारी गड़बड़ी की थी। उसने अपने नजदीकी ठेकेदार भरत कश्यप और उसके पिता को ठेका दिया था, जबकि उन्होंने निविदा की राशि पंचायत खाते में जमा नहीं की। लाखों रुपये की यह राशि अब तक पंचायत की बहीखातों में दर्ज नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रकम सीधे सचिव की जेब में चली गई।आज की घटना ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है। उनका कहना है कि यह “अपरिहार्य कारण” नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को छिपाने की साजिश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन इस मामले में तुरंत कार्रवाई नहीं करता, तो वे आंदोलन करेंगे।गांव के एक बुजुर्ग ने कहा — “पंचायत जनता की है, किसी अधिकारी की जागीर नहीं। संतराम यादव को तुरंत निलंबित कर जांच शुरू होनी चाहिए।”

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